सख्त अप्पू

नन्हे मुन्ने अप्पु की लड़खड़ाती जबान जिसमें मुफ्त का मक्खन मिसरी का मिसरण हो जाये तो जुुबान में मिठास का तड़का लग तो जाता है, किन्तु जुबान  मछली के जैसे पच पच फिसलती है , और राफेल जैसे फैंटेसी वर्ल्ड मे गोते मारती हैं , फिसलती जबान से धोखा हो जाता , दिमाग में कुछ जुबां में कुछ, !  कोमल नयनो में बेशक फूर्ती हैं तभी तो किंडरगार्टन में मम्मा के सामने टीचर साहब की उपस्थिति में अपने अंकल के ऊपर चक्षुओ से वार करना और फिर गले पड़ जाना कि अंतल-अंतल 5 स्टार चॉकलेट अमे खाने दो अंतल ( अंकल 5 स्टार चॉकलेट हमें खाने दो) , किन्तु भाइयों और बहनो$$$ अंक$$$ल कंजूस हैं ! अप्पू  बेटा अंकल से पैसे मांग लेते तुमने तो उनका पेशा ही मांग लिया , नटखट !!!

युवावस्था और बचपन का घुला मिला उच्चतम गुणवत्ता वाला यह राजनैतिक उत्पाद राजनीति के पुराने बीज की उपज हैं, इसमें उत्पाद का दोष नहीं कि वह राजनीति के बाजार मे आया किन्तु यह तो रीति रिवाज ही हैं , खून में , किस्मत में, डीनए में , ऊपर का थप्पा लगवाई के आये थे , कि भाया हम तो मजा लेंगे ई लोगवा पैसा देंगे..!!
     यथार्थ हैं कि
     तरूवर कहे पात से, सुनो पात मम् बात
     हर घर की यह रीत है, एक आवत एक जात..!


किंतु मुझे अंदेशा हैं कि ऊपर लिखा यह सही हैं कि नहीं,  इस घोर चिंता का कारण है , इस हद तक सख्ती अप्पू मियां की, हमारा अर्धशतकीय अप्पू अभी भी अधूरा हैं , आधी उम्र में अधूरा अप्पू  की कुंडली में राहु केतु की बिगड़ी दशा आने वाले समय के राजनीतिक संकट की ओर ईशारा कर रही हैं.!

या अप्पू अपने अंकल की गद्दी पाने के लिए प्रतिबद्ध हैं , तभी बगल की गद्दी में अप्पी को विराजमान करवा कर किसी अगले नये नन्हें पप्पू को मंगल से बुलाकर भावी परसीडेन्टवा का उस पर मुहर लगाएंगे !!
यह ˈस्‍ट्रैटजी , कठोर परिश्रम , और भयंकर लक्ष्य प्रसंशनीय हैं..!!
अप्पू ऐसा लक्ष्य साधने वाले आप राजनीति के एकलव्य हैं…!!!

आयुष ठाकुर 😊😊


  

Future planning


राधे राधे 🙏🙏

अरे  जयराम जी की “किसान बेहाल” चचा, कहो चचा कौन सी खिचड़ी पका रहे इस हरे कच्चे धान से .! बेटा पकाते हम हैं, खाते वो हैं.!! फिलहाल तो हम फ्यूचर प्लानिंग (Future planning) कर रहें बबुआ..!!

चचा, नानी का नुस्खा हैं, कान के रोग में राई में कढां लहसुन का तेल बहुत फायदेमंद होता हैं..! .हा बबुआ हा ..!!.सुने चचा, मैं दिल्ली जा रहा ,कमल के कानो में ,आखो में कीचड़ घुस गया हैं तब से कम सुनता तथा देखता भी हैं, उसके कान को अब हम नानी याद दिलाएंगे . बेबस पोषणकर्ता खेत में हल नहीं , सारे देश की गली सड़क में हल चला रहा शायद जमीन से जुड़े लाठी की आवाज़ सुन ले.! खाना परोसने वाले खाक हो रहे हैं , अंधे , बहरे है कम से कम नाक से सूंघ लें.!!  और देख लेना, किसान का गुस्सा और युवा की हाय ले रहा है , मुझे अंदेशा है कि कही कमल को कोई तोड़ न लें. दुनिया का क्या भरोसा दिवाली नज़दीक है !!

तो चचा चल रहे दिल वालो की दिल्ली, अपने अरमानो के संघर्ष में.., अपने लिए तो कुआ खाई हैं, या तो कोरोना से मरेंगे या फिर सापो के बिल की चपेट में..!!
बबुआ सोच रहे थे कि घर मे रहकर फसल आने तक शान से रहते हैं फिर आराम से आत्महत्या कर लेगें, सत के गत मे शक्ति होती हैं, इससे अंधो की आंख और बहरो के कान शायद खड़े हो जाए.., बस काम करना हमारी शानफुल सुसाइड को ज़्यादा TRP वाले चैनल मे दिखाना , ससरा शौक है TV में आने का हमको ..!! Want to be famous just after Last breath.. कैसी लगी हमारी future planning .!!!!

Ayush Thakur 

गलतफहमी का फूल

हरे कृष्ण 😊🙏🙏

वसंत ऋतु जैसा खुशमिजाज़ हंसता हुआ संस्कारी भँवरा और बिंदास बारिश में निकला मौजी इंद्रधनुष के जैसा रंग-बिरंगी फूल|ऋतु वसंत हो तो क्या कहना फिर ! मौका भी मुहूर्त भी और दस्तूर भी, भँवरा तो फूल के तरफ फाऊल हो ही जाता हैं चचा |

बागवानी में एक से बढ़कर एक रंग-बिरंगी खुशबूदार फूलो की बेला ,  पर भँवरा तो भँवरा था, और शायद इसलिए “अजीब” था कि वो एक ही फूल में खो गया था, कोई और फूल में न बैठकर सिर्फ़ एक ही फूल को ढूढ़ता |

हर बार किस्मत का साथ हो ,सोने में सुहागा हो और सब सोना ही सोना हो जरूरी नहीं कई बार अक्वा रिजिया (शाही जल) से साफ़ भी करना पड़ता हैं  | चचा चीज़ साफ तो होती हैं परन्तु नुकसान भी उठाना पड़ता हैं जैसे चित हैं तो पट भी हैं|

.                  और कुछ खेल तो फूल व भँवरा के बीच में भी हुआ ,पहले तो आदर सम्मान की सुई ने पहचान के धागे से दो अंजान ,फूल और भँवरा, की दोस्ती की नई चादर सिल दी | हम भारतीय दो सनातनी संस्कारी श्लोक में बहुत गौर करते हैं —          1.  वसुधैव कुटुम्बकम्    !                             2. तिथि देवो भवः !

                    पर  भविष्य को , कलयुग का कौन महान व्यक्ति जानता हैं भाईसहाब |  भँवरा तो अजीब था , कैसे पता नहीं, पर था | भँवरा अजब से गजब बनने की फिराक में किसी कोचिंग में ज्वाईन कर चुका था, संयोग से फूल ने ही कोचिंग का बीड़ा उठाया | पर साथ ही कोई भावनात्मक मजाक का गहरा असर फूल पर पड़ गया और यही वो मालगाड़ी थी जिस पर गलतफहमी का खाद सवार होकर आया और फूल और भवरे के बीच घुल गया और एक दरार को पोषित कर दिया |

शक हो या मजाक,  यदि गलतफहमी का खाद मिल जाये तो दरार , मतभेद का पौधा दोगुनी – तिगुनी तेजी से बढ़ता हैं |

       मजाक “महान” था या बेकार,  पर मजाक तो मजाक होता हैं ,ISO certified  मजाक कौन करता हैं , परंतु भँवरा क्या जाने मजाक का स्वाद! कर दिया और ये मजाक ,मजाक नही एक गलतफहमी बन गई | सभी के परिणाम स्वरूप, रह गयी तो बस एक दरार और जो कि बन गयी थी गलतफहमी के पौधे के कारण …!!!

                                     —आयुष ठाकुर 🙏🙏

गधा राजा, गुलाम शेर

गणेशाय नमः 😊🙏🙏

राजनीति पर व्यंग ..!!!

अपने गिरेवान का कीचड़ सोते हुए शेरो में बेचने वाला, बहुत महान गौ के समान शांत, बाज सा दूरदर्शी, मच्छर की भांति खून चूसने वाला, बरनोल सी बातो से दिल को ठंडक पहुंचाने वाला, दो पैर का गधा पीठ में अपने अधिकार क्षेत्र की समस्याओं का झोला टांगे लेफ्ट राइट करते हुए किसी किंडरगार्टन में समस्या के साथ खेल रहा था .

तभी सरदार जी की तगडी वाली एंट्री के साथ अभिवादन का दौर परंतु सन्नाटा था.  बृो ये शोर की सुनामी के पहले की शांत ठंडी हवा थी , और ये क्या सब के सब रहकने लगे,  समस्याओं की आहुति या ये कहूं अपने घर का गुस्सा इस कोपभवन मे निकाल रहें, क्या तबीयत से रहकते हैं भाई गरजा देते हैं जैसे मेघनाद हो..!!

इतना सुनकर भी सोता शेर नहीं जागा,  और गधा ठाट से शेर के इलाके में निर्भीक घूम कर राजा बनने की तैयारी करता रहा. सबको झाम देकर , लोभ , लालच  देकर अपना सिक्का जमा लिया और ईमान को लोभ के तराजू मे तोल कर इतिहास रच दिया रेेेे,और किंडरगार्टन पहुँच जाता हैं !!

आ गया आ गया,  गधे के कंधे में शेर की देखरेख का भार आ गया. और गजब हो गया – बहुत गजब हो गया, शेरो की बस्ती का राजा गधा बन गया और शेर ने ख़ुशी खुशी गधे की ताजपोशी मे ताली बजा कर चार मून लगा दिये..  !!

ऑफिसियली अब शेर गधे का गुलाम हैं. शेरो के इस प्रयास के लिये धन्यवाद . अब आप घर जा सकते हैं.!!😊😊

….आयुष ठाकुर

Next Generation ख्वाब (व्यंग )

जय गणेश🙏🙏

मैं कुछ सोच पाता उससे पहले ही माता पिता ने मेरी खुशहाल जिंदगी का स्वप्न अपनी खुशनुमा, ममतामय, करूणामय और भावुक आंखों में सजा लिया और रिश्तेदारी मे इस स्वप्न का प्रमोशन कर दिया. और इस पोस्ट में बहुत सारे रिश्तेदारो के कमेंट , लाइक, डिसलाइक आये. लेकिन बच्चा अभी बाटल से अमूल दूध पीकर आंगनवाडी में जाने के लिए तैयार हैं. !

बच्चा अब बच्चा नहीं रहा, स्कूल कॉलेज मे कहर मचा रहा . खा पीकर किसी सामान्य WWE Wrestler के जैसा होलसोल मुस्तंडा हो गया है, और स्कूल में से पास करके कॉलेज के रथ में सवार होकर बड़ा, अमीर , पैसा वाला बनने के रथ को अपनी पूरी मेहनत, लगन, विवेक के साथ जोर जोर से हकाल रहा (चला) हैं.

पर यह क्या रथ में सरकारी कील कैसे चुभ गये ? किसी के चक्के जाम हो गयेे ,और कुछ सारथी ने तो रथ के साथ अपने आप को अंतरिक्ष में किसी बेबस , लाचार , असहाय, बेरोजगार तारे की भांति स्थापित कर लिया. जवान तो कमल के समान कोमल, मखमली रास्ते से यात्रा कर रहा था, पर ये अजब गजब कैसे??. इतना गजब का छलावा रामायण में मारीच ने किया , महाभारत में पांडवो ने द्रोणाचार्य ,भीष्म के साथ किया किन्तु  तथाकथित हैं कि  यह धर्म स्थापना के लिए लीला की गई. सात्विक लीला थी, और ये जो हमारे साथ हो रही सरकारी लीला तो नहीं ? अब इसकी भी CBI and NCB जांच करवाना पड़ेगा.

परन्तु मैं कहता हूं आत्मनिर्भर नाम का लड्डू परोस रहे , कही यह लीला इसलिए तो नहीं, पर क्यों.,!

पहले बड़ा बनने का सपना था अब आत्मनिर्भर बनने का..!!😊

कहते हैं रोजगार दीवाना हो गया है सत्ता के प्यार में, और सत्ता मस्तानी हो गयी हैं . अब सत्ता और रोजगार के बीच जो आयेगा लासे बिछ जाएंगी लासे..!!

सात्विक और सरकार , जो सपना उन्होने देखा मेरे लिए शायद मैं भी आने वाले के लिए देखू, दुखी हूं..!! Next generation ख्वाब 😊😊

आयुष ठाकुर 😊